राज्यपाल ने कहा-लालकिले पर निशान साहिब के झंडे को फहराना गलत नहीं

मलिक के मुताबिक गणतंत्र दिवस पर लालकिले पर निशान साहिब का झंडा फहराना गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि सिख युवक ने किसी पार्टी का झंडा नहीं फहराया था और वहां नहीं फहराया, जहां प्रधानमंत्री फहराते हैं, लेकिन उसको ऐसे कहा गया, जैसे देशद्रोह का काम हो गया। पानीपत में एक कार्यक्रम के दौरान मलिक ने कहा- लालकिला पर झंडा फहराने का पहला हक देश के प्रधानमंत्री को है, लेकिन उसके बाद अगर किसी का हक है तो सिखों को है और हमको (जाटों को) है।

राज्यपाल ने कहा-लालकिले पर निशान साहिब के झंडे को फहराना गलत नहीं
राज्यपाल ने कहा कि लालकिला के सामने ही सिखों के गुरु का सिर काट दिया गया, क्योंकि उन्होंने धर्म परिवर्तन करने से इनकार कर दिया था। अगर उनकी औलाद को लालकिला पर झंडा फहराने का अधिकार नहीं है तो किसको है।

4 जुलाई 22।  मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक कई मौकों पर मोदी सरकार के खिलाफ बयानबाजी करते आए हैं। चाहे वो किसान आंदोलन हो, अग्निपथ स्कीम हो या कोई और। इस बार उन्होंने 2021 में गणतंत्र दिवस के मौके पर लालकिले पर निशान साहिब के झंडा फहराने को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान लालकिला पर निशान साहिब के झंडा लगाने को सही ठहराया है।

लालकिले पर झंडा फहराने का दूसरा अधिकार हमारा- मलिक
राज्यपाल ने कहा कि लालकिला के सामने ही सिखों के गुरु का सिर काट दिया गया, क्योंकि उन्होंने धर्म परिवर्तन करने से इनकार कर दिया था। अगर उनकी औलाद को लालकिला पर झंडा फहराने का अधिकार नहीं है तो किसको है। राज्यपाल ने कहा कि दूसरे- हमारे (जाट) वाले हैं, जो हर छठे महीने लालकिला पर चढ़ जाते तो कभी किले पर। कभी अकबर की कब्र खोद देते थे। इसलिए, दूसरा अधिकार हमारा है।

मलिक बोले- आधी लड़ाई लड़ चुके, आधी बाकी है
रविवार को पानीपत के मतलौडा स्थित तीरखु तीर्थ पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक के लिए संयुक्त किसान संघर्ष समिति की ओर से सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। वहां वे गांव सींक, पाथरी, ऐचरा कलां, रामनगर और कुरड़ के लोगों को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन में उन्होने कहा कि किसान आधी लड़ाई लड़ चुके हैं, लेकिन आधी अभी बाकी है। जब तक एमएसपी गारंटी कानून नहीं बनेगा, तब तक किसानों की आय वृद्धि के दावे छलावे ही रहेंगे।

अग्निपथ पर भी साध चुके हैं निशाना
सत्यपाल मलिक सेना भर्ती स्कीम अग्निपथ योजना का भी खुलकर विरोध कर चुके हैं। पिछले रविवार (26 जून) को बागपत में उन्होंने कहा था कि यह योजना जवानों के खिलाफ है। यह उनकी उम्मीदों के साथ धोखा है। 6 महीने की ट्रेनिंग, 6 महीने की छुट्टी और 3 साल की नौकरी के बाद जब जवान घर लौटेगा तो उसकी शादी तक नहीं होगी।'